Home / fort / कामां के मुख्य तथ्य के बारे में एवं इतिहास

कामां के मुख्य तथ्य के बारे में एवं इतिहास

इतिहास:-

कांमा को हिंदुओं के लिए एक बहुत पुराना और पवित्र शहर माना जाता है क्याके कि यह ब्रज क्षेत्र का हिस्सा बनता है। जहां भगवान कृष्ण ने अपनी प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था। इसे कामवन भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसका पूर्व नाम ब्रह्मपुर रहा है, लेकिन कृष्ण के मातृ दादा राजा कामसेन ने इसे अपने नाम के बाद कामांन में बदल दिया।
यह वैष्णव के हिस्से के रूप में भादो के महीने में बडी संख्या में वैष्णव द्वारा तीर्थयात्रा का एक स्थान है। कामां में 84 कुण्ड (तालाब) भी है जिनमें से कई सूख गए हैं। यह लंबे समय से जयपुर राजा के शासन में था लेकिन महाराजा जवाहर सिंह ने विजय प्राप्त की और कब्जा कर लिया । जयपुर प्रमुखों के कुछ महल अभी भी मौजूद हैं। महाराजा जय सिंह ने मदन मोहनजी और गोकुल चंद्रमणजी की मूर्तियों को जयपुर शहर में ले लिया, लेकिन किसी कारण से बीकानेर से थोड़ी देर के बाद मूर्तियों को कामां वापस लाया गया।
‘चेचक महल’ (ईगल महल) के ऊंचे मैदान पर परिक्रमा मेला या पर्कम्मा नामक बरसात के मौसम में एक मेला आयोजित किया जाता है। महल को इसकी उंचाई के कारण ‘चेचक महल’ बुलाया गया था।
यह छोटा शहर राजस्थान के कुछ प्रमुख मंदिरों जैसे गोविंदजी मंदिर विमल कुंड कामां का शिवजी का मंदिर और चैरासी खंबा के लिए जाना जाता है।

पौराणिक महत्ता:-

कामां ब्रज का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। इसका पौराणिक नाम कामां था। ब्रज की चैरासी कोस परिक्रमा मार्ग में इस स्थान का अपना महत्व है। इंद्र स्तुति करते है कि हे कृष्णा आपके ब्रज में अति रमणीक स्थान है। उन में हम सभी जाने की इच्छा रखते हैं पर जा नहीं सकते। ब्रज के 12 प्राचीनतम वनों में कामां पांचवा वन है। मथुरा से 65 किमी पश्चिम दिशा में गोवर्घन और डीग होते हुए सडक मार्ग से कामां पंहुचा जा सकता है।

मानचित्र – कामां

प्रमुख दर्शनीय स्थल:-

विमल कुण्ड यहां सरोवर मात्र न होकर लोक -समाज के लिए आज भी तीर्थ स्थल की तरह है। आज भी यहां यह लोक मान्यता है कि आप चाहे चारों धाम की तीर्थ -यात्रा कर आये यदि आप विमल कुण्ड में नहीं नहाये तो आपकी तीर्थ -भावना अपूर्ण रहेगी।

विमल बिहारी मंदिर

चरण पहाडी

भोजन थाली

प्राचीन महलों के भग्नावशेष

कामां के अन्य मंदिर:-

कामां जिसे पौराणिक नगरी होने का गौरव हासिल है मध्यकाल से पूर्व की बहुत प्राचीन नगरी है। इसका ब्रज के वनों में केंद्रीय स्थान रहा है इसे कामां इसीलिये कहा जाता है। कोकिलावन भी इसके बहुत नजदीक है। वहां नंदगांव हो कर जाते है। नंदगांव कामां के पास ही सीमावर्ती कस्बा है यधपि वह उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में आता है। ब्रज-संस्कृति में प्रेम तत्व ही प्रधान रहा है जिसके प्रति रसखान जैसे पठान कवि इतना सम्मोहित हो गया कि उसमें जन्म जन्मान्तर तक हर रूप में यहीं का होकर रहने की कामना की।

कामां में चैरासी खभ्भा:-

कामां में चैरासी खभ्भा नामक मस्जिद हिंदू मंदिर के ध्वंसावशेषों से निर्मित जान पडती है। मस्जिद के स्तंभ घट-पल्लव के अलंकरण तथा प्रतिमाओं से युक्त है। अभिलेख के लिपि के अनुसार यह मंदिर आठवीं शताब्दी ईस्वी का प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य अभिलेख युक्त स्तम्भ से विष्णु मंदिर के निर्माण का पता चलता है। शूरसेन वंश के दुर्गगण की पत्नी विच्छिका ने एक विष्णु मंदिर बनवाया था। विष्णु पुराण के अनुसार यहाँ कामां की परिधि में छोटे बडे असंख्य तीर्थ है। कामां अपने चैरासी कुंडों चैरासी खंभ्भों और चैरासी मंदिरों के लिए जाना जाता है। यधपि अनुरक्षण के अभाव में यहां के अनेक मंदिर नष्ट होते जा रहे है फिर भी यहाँ के कुछ तीर्थ आज भी अपना गौरव और श्री कृष्ण की लीलाओं को दर्शाते हैं। कामां सप्तद्वारों के लिये भी जाना जाता है।

कामां के सात दरवाजे:-

डीग दरवाजाः – कामां के अग्नि कोण (दक्षिण -पूर्व दिशा में ) अवस्थित है। यहाँ से डीग (दीर्घापुर ) और भरतपुर जाने का रास्ता है।

आमेर दरवाजा:- कामां गाँव के दक्षिण कोण में अवस्थित है। यहाँ से सेतुबन्ध कुण्ड की ओर जाने का मार्ग है।

दिल्ली दरवाजा:- यह कामां के उत्तर में अवस्थित है। यहाँ से दिल्ली जाने का मार्ग है।

मथुरा दरवाजा:- यह गाँव के पूर्व में अवस्थित है। यहाँ से बरसाना हो कर मथुरा जाने का मार्ग है।

About admin

Check Also

बयाना-इतिहास और किले के मु़ख्यतथ्य के बारे में

बयाना भारत गणराज्य के राजस्थान प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। बयाना को वाणासुर की …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *