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डीग का इतिहास और किले के मुख्य तथ्य के बारे में

डीग| राजस्थान राज्य के भरतपुर जिले का एक प्राचीन

ऐतिहासिक शहर है। इसका प्राचीन नाम दीर्घापुर था। स्कंद पुराण में दीर्घ या दीर्घापुर के रूप में इसका उल्लेख है। भरतपुर शहर से 32 किमी की दूरी पर स्थित है। यह रोचक छोटा सा नगर अपनी बेजोड किलेबंदी अत्यधिक सुंदर बगीचों और कुछ भव्य महलों के कारण दर्शनीय है। यह स्वंय ही एक गढी के रूप में निर्मित था। इसकी लंबाई -चैडाई 50गज है। प्रारंभ में यहां सैनिको के रहने के लिए स्थान था। बाहर किले के चतुर्दिक मार्गो की सुरक्षा के लिए छोटी छोटी गढियां बनाई गई थी- जिसमें गोपालगढ जो मिट्टी का बना हुआ किला है सबसे अधिक प्रसि़द्व था। यह शाहबुर्ज से कुछ ही दूरी पर है। इन किलों की मोर्चाबंदी के अंदर सुंदर सुसज्जित नगर -डीग था जो अपने वैभवकाल में (18 वीं सदी में ) मुंगलो की तत्कालीन अस्तोन्मुख राजधानियों दिल्ली तथा आगरा के मुकाबले में नजदीक दीखता था।

डीग के किले की जानकारी

डीग किला और जलमहल सूरजमल के महत्वपूर्ण निर्माण है। यहां की निगरानी बुर्ज (वाच टावर) जहां से न केवल पूरे महल को देखा जा सकता है आगरा किले से लूट कर यहां लाई तोप के अलावा गहरी खाई बडी दीवारों और मजबूत द्वारों के घिरे अब इस किले के अवषेश मात्र ही देखे जा सकते है। डीग के किले का इतिहास अत्यंत रोचक है। बदले में सवाई जयसिंह ने बदन सिंह को “ब्रजराज” की उपाधि से सम्मानित किया। उन्हे नगाडा निशान तथा पचरंगी झंडे के प्रयोग की अनुमति प्रदान की | अपने इरादे को मूर्त रूप देने के लिए सबसे पहले उसने डीग के समीप स्थायी निवास और राज्य का सदर दफ्तर बनाया उसके बाद ब्रज के कई जमींदारों और सरदारों से मैत्री -सम्बन्ध स्थापित किये। उनका स्वभाव रक्स बहाना नहीं अपने राज्य का निर्माण करना था। डीग और भरतपुर के अजेय किलों के निर्माण और उनमें सुन्दर महलों की रचना करना उनका शौक था। बदन सिंह ने आगरा के उन शिल्ल्पियों को रोजगार दिया था इसी तरह उन्होने तालाब बनाने ईंटे पकाने घास के सुन्दर मैदान विकसित करने एवं फव्वारे बनाने वालों को काम दिया।

डीग के महल की जानकारी

डीग के महलों में चतुष्कोण बनाते हूए बीच में 200-300 फीट बगीचा है। यह तीनो ओर दुमंजिला है और बीच में विशाल सभा भवन है। गोपाल भवन से थोडी दूर दो छोटी इमारतें है जो सावन – भादों भवन के नाम से जानी जाती है। इन दोनों महलों के बीच इस मजबूत इमारत की छत पर एक टंकी है जो इन सभी महलों व बगीचों में जल प्रवाह करती है। भंडार की विशाल क्षमता को आवश्यक मजबूती प्रदान करने में यह टंकी हिंदुस्तान में बेजोड है।

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